सम्मान, सम्मेलन और कविता का खोता जन-सरोकार: जब मंच कविता से बड़े हो जाएँ
कविता समाज की सामूहिक चेतना की आवाज़ होती है। वह समय का दस्तावेज़ भी होती है और समय से टकराने का साहस भी। लेकिन आज के कवि सम्मेलनों, साहित्यिक आयोजनों…
कविता समाज की सामूहिक चेतना की आवाज़ होती है। वह समय का दस्तावेज़ भी होती है और समय से टकराने का साहस भी। लेकिन आज के कवि सम्मेलनों, साहित्यिक आयोजनों…
संत रविदास जी जयंती पर विशेष लेख “मन चंगा तो कठौती में गंगा” — यह केवल एक पंक्ति नहीं, बल्कि संत शिरोमणि रैदास जी का संपूर्ण जीवन-दर्शन है। इस वाणी…