बजट 2026 किसान प्रतिक्रिया
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केंद्रीय बजट 2026–27 पर BKU की प्रतिक्रिया | किसान निराश

नई दिल्ली।
केंद्रीय बजट 2026–27 देश के किसान, मज़दूर, आदिवासी समाज और ग्रामीण भारत की मूल समस्याओं का समाधान करने में असफल रहा है। यह आरोप भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष रतन मान ने जारी बयान में लगाया।

उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई, खेती की लागत में लगातार वृद्धि, कर्ज़ के बढ़ते बोझ और गिरती आय से जूझ रहे किसानों के लिए बजट में न तो कर्ज़ मुक्ति को लेकर कोई ठोस पहल की गई है और न ही न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को कानूनी गारंटी देने का कोई प्रावधान किया गया है।

🌾 ग्रामीण रोज़गार पर बजट निराशाजनक

रतन मान ने कहा कि ग्रामीण रोज़गार और बेरोज़गारी के सवाल पर भी यह बजट पूरी तरह निराशाजनक है। रोज़गार योजनाओं को मज़बूत करने, न्यूनतम मज़दूरी बढ़ाने और मज़दूरों की सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने को लेकर बजट में कोई स्पष्ट दिशा नहीं दिखाई देती। इससे ग्रामीण युवाओं में बढ़ती बेरोज़गारी की समस्या और गहरी होने की आशंका है।

🌳 आदिवासी समाज की अनदेखी

उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के जल-जंगल-ज़मीन, शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका जैसे बुनियादी मुद्दों को भी बजट में अपेक्षित प्राथमिकता नहीं दी गई। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के बजाय बजट का झुकाव एक बार फिर शहरी और कॉरपोरेट हितों की ओर दिखाई देता है।

📉 ज़मीनी सच्चाइयों से दूर बजट

भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि कुल मिलाकर यह बजट ज़मीनी सच्चाइयों से दूर, केवल आंकड़ों और घोषणाओं का बजट है, जिसमें देश के अन्नदाता और मेहनतकश वर्ग की अपेक्षाओं की अनदेखी की गई है।

उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि किसान, मज़दूर, आदिवासी और ग्रामीण भारत को केंद्र में रखकर नीतियों और बजटीय प्रावधानों पर पुनर्विचार किया जाए, ताकि देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को वास्तविक मजबूती मिल सके।

रतन मान,प्रदेश अध्यक्ष भारतीय किसान यूनियन

By Ritik Madad

Ritik, Crime Editor at Roj Nyari Baat. Local crime, law & order se judi khabron par focus

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