आज दिनांक 27 जनवरी 2026 को अन्तरराष्ट्रीय जाट संसद के राष्ट्रीय संयोजक डॉ नवीन नैन भालसी ने यूजीसी के नए नियमों को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार द्वारा लागू किए गए यूजीसी के नए नियमों को लेकर स्वर्ण समाजों में व्यापक स्तर पर विरोध के स्वर सुनाई दे रहे हैं।
डॉ नवीन नैन भालसी ने कहा कि यूजीसी के ये नए नियम भविष्य में जाट समाज सहित अन्य स्वर्ण समाज के युवाओं के हितों को प्रभावित कर सकते हैं। उनका कहना है कि इस प्रकार के नियम समानता के अधिकार का हनन करते हैं और यह पूरी तरह से संविधान विरोधी प्रतीत होते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि यूजीसी के नए नियम विश्वविद्यालयों में समानता लाने के बजाय समाज में विभाजनकारी सोच को बढ़ावा देंगे। सरकार को चाहिए कि वह इस तरह के कानून को तत्काल प्रभाव से निरस्त करे और ऐसी व्यवस्था लागू करे, जो सर्व समाज के छात्रों के हितों की रक्षा करे।
डॉ नवीन नैन भालसी ने यह भी कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में इस प्रकार के नियम किसी भी दृष्टि से उचित नहीं हैं। शिक्षा समान अवसर प्रदान करने का माध्यम है, जातिगत विभाजन का नहीं। विश्वविद्यालय राजनीति का केंद्र नहीं, बल्कि शिक्षा का मंदिर होने चाहिए।
उन्होंने कहा कि छात्रों को वर्गों में बांटने वाला यह निर्णय देश के भविष्य के लिए चिंताजनक है। कक्षा में बैठा युवा ही देश का भविष्य है, इसलिए उसे जातिगत वर्गीकरण में बांटना उचित नहीं है।
अन्त में डॉ नवीन नैन भालसी ने वर्तमान सरकार से सवाल करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य अवसर देना है। उन्होंने यूजीसी से अपील की कि वह इस फैसले पर पुनर्विचार करे और इसे वापस ले, अन्यथा अन्तरराष्ट्रीय जाट संसद सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेगी।
